पथ की नीरवता पथिक की विषमताएँदोनों की ही विवशता सामंजस्य कैसे बैठाएँ ?
एक असंख्य्क रहस्यों का ज्ञाता दूसरे में भरी अनेक अभिलाषाएँएक ही ओर जाते दोनों फिर भी, पृथक कितनी दिशाएँ ।
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