जग जननी का नैराश्य, पथ में काँटों का बिखरना ।बेसुध पथिक का भाग्य , पग में उसका चुभ जाना ।
चपल पल की जिज्ञासा ठहर , अनूठा दृश्य यह देख जाना ।आँसू टपका गया वह वैरागीकरुणा के बीज का अंकुर बन आना ।
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