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रेखाएँ

Monday, October 8, 2007

टूट गयी हैं शब्दावलियाँ
शिराओं की गाथाएं भी मूक हैं ।
मौन धरे इस ह्रदय में
व्यथाएं अनेक, राग सिर्फ एक है ।

Posted by Kamlesh Nahata at 4:53 PM

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